समाज

उत्तराखंड में हुए थे चार अश्वमेध यज्ञ

  • उत्तरकाशी के पुरोला व दून के जगतग्राम में कुणिंद शासक शील वर्मन ने चार अश्वमेध यज्ञ किए थे
  • अब तक हुई पुरातात्विक खोजों ने साबित कर दिया है कि उत्तराखंड में भी चक्रवर्ती सम्राट हुए हैं

By Arvind Shekhar 

देहरादून। जब भी देश के इतिहास की बात होती है तो उसमें उत्तराखंड को बहुत महत्वपूर्ण जगह नहीं मिल पाती है, लेकिन आजादी के बाद हुई पुरातात्विक खोजों ने साबित कर दिया है कि उत्तराखंड में भी चक्रवर्ती सम्राट हुए हैं। पुरातात्विक अवशेषों से साफ हो गया है कि कभी देवभूमि उत्तराखंड में भी अश्वमेध यज्ञ के घोड़े दौड़े थे। उत्तराखंड के चक्रवर्ती सम्राटों ने एक दो नहीं, बल्कि चार—चार अश्वमेध यज्ञ कराए।

uttrakhand-ashwamedh-yagya
पुरोला में इसी जगह पर हुए थे अश्वमेध यज्ञ।

पुरातत्वविदों को स्पष्ट प्रमाण मिले हैं कि पुरोला और देहरादून के जगत ग्राम में कुणिंद शासक शील वर्मन ने चार अश्वमेध यज्ञ किए थे। हालांकि उत्तराखंड में कुणिंद शासकों के बारे में अभी बहुत जानकारी नहीं है लेकिन समूचे उत्तराखंड में उनके सिक्के मिलते हैं, जो प्रमाण हैं कि ईसा से दो सदी पूर्व से लेकर तीसरी ईस्वी सदी तक उत्तराखंड में कुणिंदों का आधिपत्य रहा। सबसे खास बात तो यह है कि देश में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पुरोला के अलावा अब तक कोई भी स्थल नहीं मिला है जहां अश्वमेध यज्ञ की वेदी का इतना स्पष्ट ढांचा हो।

 इस स्थल पर प्राचीन विशाल उत्खनित  ईंटों से बनी यज्ञ वेदी मौजूद है। पंख फैलाए गरुड़ के समान बनी इस यज्ञ वेदिका स्थल का उत्खनन हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने करवाया था। स्थल की खुदाई में लघु केंद्रीय कक्ष से शुंग कुषाण कालीन (दूसरी सदी ईसवी पूर्व से दूसरी सदी ईसवी ) मृदभांड, दीपक की राख,जली अस्थियां और काफी मात्रा में कुणिंद शासकों की मुद्राएं मिली हैं। देहरादून जिले में यमुना नदी के बाएं तट पर स्थित जगतग्राम नामक अश्वमेध स्थल अवशेष स्थल है। इस स्थल का उत्खनन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 1952—54 में किया था।

Jagatgram-inscription
जगतग्राम में अश्वमेध यज्ञ से संबंधी मिले शिलालेख।

उत्खनन में कुणिन्द शासक राजा शील वर्मन (लगभग तीसरी सदी) द्वारा कराए गए चार अश्वमेध यज्ञों में से तीन के अवशेष पक्की ईंटों से बनी यज्ञ वेदिकाओं के रूप में मिले हैं। इन्हीं ईंटों पर शील वर्मन ब्राह्मी लिपि संस्कृत भाषा में उत्कीर्णित अभिलेख भी मिला है, जिससे पता चलता है कि शील वर्मन ने चार अश्वमेध यज्ञ किए थे। पुरोला में मिली अश्वमेध यज्ञ वेदी जगतग्राम से पुरानी है। इन दोनों जगहों के पुराअवशेषों से तीन अश्वमेध यज्ञों का तो पता चलता है लेकिन चौथे अश्वमेध यज्ञ के स्थान का अभी पता नहीं चल पाया है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *