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ताजमहल को बंद कर दो या कर दो ध्वस्त, जानिए किसने कहा और क्यों!

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लगायी कड़ी फटकार, लगातार खराब हो रही है ताजमहल की स्थिति, नहीं दे रही सरकारें कोई ध्यान। अगर यही हाल रहा तो ताज की शान हो जाएगी नष्ट।
नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रीय धरोहर और शान ताजमहल की हालत खराब है। पिछले कई वर्षों से ताजमहल की सुंदरता बिगड़ती जा रही है। आगरा और आसपास के शहरों में बढ़ रहे प्रदूषण आदि ने ताजमहल की खूबसूरती को खराब करने का काम किया है। लेकिन राज्य और केंद्र सरकार ताज को बचाने के लिए बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं। इस संदर्भ में कई बार सुप्रीम कोर्ट और विशेषज्ञ कई बार चेतावनी दे चुके हैं। लेकिन सरकार और संबंधित एजेंसियों की कानों में जूं तक नहीं रेंग रही। इस रवैये से नाराज देश की सर्वोच्च अदालत ने सरकार को कड़ी फटकार लगायी है। अदालत ने तीखे शब्दों में कहा है कि आप ताज का संरक्षण करो या बंद कर दो या फिर ध्वस्त करना ही विकल्प है। उच्चतम न्यायालय ने सरकार के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पेरिस के एफ़िल टॉवर को देखने के लिए प्रति वर्ष 80 मिलियन लोग आते हैं। जबकि ताज का दीदार करने को लगभग दस लाख पर्यटक आते हैं। आप लोग ताज की स्थिति सुधारने के लिए गंभीर नहीं हैं और न ही आपको इसकी परवाह है। हमारा ताज एफिल टावर से भी ज्यादा खूबसूरत है। लेकिन ताज की सुंदरता और वहां आने वाले पर्यटकों को लेकर गंभीर नहीं हैं। इससे देश को नुकसान हो रहा है। ताजमहल को लेकर बेहद उदासीनता है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सरकारें ध्यान रखती तो हमारी विदेशी मुद्रा की दिक्कत दूर हो जाती। अदालत ने कहा कि प्रदूषण बढ़ने के बावजूद टीटीजेड यानी ताज ट्रैपेजियम एरिया में फैक्ट्री और उद्योग आदि लगाने के लिए आवेदन किए जा रहे हैं, और उनके आवेदनों पर विचार किया जा रहा है। ये पूरी तरह नियम और आदेशों का पूरी तरह उल्लंघन है। अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस इलाके में उद्योग लगाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस बाबत अदालत ने टीटीजेड के चेयरमैन को नोटिस जारी करते हुए तलब किया है।
हालांकि केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष कहा कि इस बाबत एक समिति का गठन किया गया है। उसका काम ताजमहल में हो रहे प्रदूषण के बारे में जानकारी हासिल करना होगा, कि किन कारणों से ताज की सुंदरता को प्रदूषण का ग्रहण लगा है। केंद्र ने यह आश्वासान दिया है कि ताज के आसपास के क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया जाएगा। समिति चार महीने में रिपोर्ट पेश करेगी, उसके बाद फैसला किया जाएगा कि क्या इसमें किसी विदेशी विशेषज्ञ को शामिल करने की आवश्यकता है नहीं।
इससे पहले याचिकाकर्ता एमसी मेहता ने कहा कि यमुना में पानी गंदा है। पहले मछलियां होती थी जो काई को खाती थीं। सरकार बैराज बना रही हैं जिसके कारण यमुना में पानी कम है। इस पर केंद्र सरकार को चार हफ्ते में जवाब देने को कहा गया कि केंद्र यमुना पर कितने बैराज बना रही है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार को ताजमहल को सदियों तक सुरक्षित रखने के विजन डॉक्यूमनेट पेश करना होगा।

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