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कैसे बनेगा छात्रों का भविष्य, जब इतने सारे पद होंगे खाली

देशभर में शिक्षकों के लाखों पद पड़े हैं खाली, सरकार ने लोकसभा में दी जानकारी

 नई दिल्ली। स्कूलों का निजीकरण और सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत किसी से छिपी नहीं है। सरकारों के तमाम दावों के बावजूद देश में शिक्षा के स्तर में कोई खास सुधार नहीं हो रहा। लाखों की संख्या में शिक्षकों के पद खाली हैं। ऐसे में देश के नौनिहालों का भविष्य कैसे उज्जवल होगा। सरकार की ओर से देश की संसद में इसकी जानकारी दी गयी है। सोमवार को सरकार ने लोकसभा में बताया कि देशभर में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के 10 लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने मार्च 2017 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्राथमिक स्तर पर सबसे अधिक शिक्षकों के पद उत्तर प्रदेश में रिक्त हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर में माध्यमिक शिक्षकों के पद सबसे ज्यादा खाली हैं।

राज्य मंत्री के मुताबिक प्राथमिक शिक्षकों 51,03,539 पद स्वीकृत हैं। लेकिन इनमें से 9 लाख 316 पद खाली हैं। उत्तर प्रदेश में प्राइमरी लेवल पर 7.59 लाख पद स्वीकृत हैं। जबकि 2.24 लाख पद खाली पड़े हैं। बिहार में 5.92 लाख पदों में से 2 लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद रिक्त हैं।

सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि माध्यमिक स्तर पर 6.85 लाख शिक्षकों में से एक लाख से ज्यादा पद खाली हैं। जम्मू-कश्मीर में 25,657 पद स्वीकृत हैं, जबकि 21,221 पद रिक्त पड़े हैं।

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