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मोदी सरकार हलाला प्रथा का करेगी विरोध

तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने करार दिया था अवैध, लोकसभा में बिल हुआ पास, लेकिन राज्य सभा में गया अटक।

 नई दिल्ली। केंद्र सरकार अब हलाला प्रथा पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है। बताया जाता है कि सरकार निकाह और हलाला प्रथा का सर्वोच्च अदालत में विरोध करने वाली है।

गौरतलब है कि हलाला के तहत कोई पुरुष अपनी पत्नी को तलाक देने के बाद तब तक उससे फिर निकाह नहीं कर सकता। जब तक कि उक्त महिला किसी अन्य मर्द से शादी कर फिर तलाक न ले ले। इस तरह महिला के साथ लैंगिक भेदभाव और उत्पीड़न की प्रबल संभावना रहती है।

संबंधित मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार केंद्र सरकार निकाह और हलाला का उच्चतम न्यायालय में विरोध करेगी। सुप्रीप कोर्ट की संविधान पीठ आगामी दिनों में हलाला की कानूनी वैधता पर चर्चा करेगी।

सरकार का मानना है कि यह प्रथा लैंगिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है। सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर चुकी है। हालांकि उस समय अदालत ने सिर्फ तीन तलाक पर सुनवाई करने का निर्णय लिया था। कोर्ट ने कहा था कि निकाह हलाला और बहुविवाह अलग-अलग मामला है।

यहां बता दें कि पिछले साल सर्वोच्च अदालत ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया था। इसके बाद केंद्र ने विधेयक के जरिए तीन तलाक को अपराध घोषित किया था। हालांकि सरकार ने बहुमत के जरिए लोकसभा में तो इस बिल को पास करवा लिया था। लेकिन राज्य सभा में पूर्ण बहुमत न होने की वजह से बिल पास नहीं हो पाया। यहां बता दें कि इस प्रस्तावित कानून में तीन तलाक कहकर तलाक देने वाले पति को तीन साल के कैद की सज़ा का प्रावधान किया गया है।

अब देखना यह है कि हलाला प्रथा के मसले पर सरकार कितना आगे पहुंच पाती है।

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