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जानिए खतरनाक स्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग के हाल…

असुरक्षित हैं इंडिया के राष्ट्रीय राजमार्ग, वर्ल्ड बैंक और एनएचएआई के सर्वे में हुआ खुलासा। साल 2017 में नेशनल हाईवेज में एक्सीडेंट्स में 52 हजार लोगों की हुई मौत।

नई दिल्ली। भारत सरकार भले ही स्वर्णिम चतुर्भुज जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग बनाकर अपनी पीठ थपथपाते नहीं थकती। यही नहीं वर्तमान में भी सड़क परिवहन मंत्रालय सड़क निर्माण को लेकर तमाम दावे करता हो। लेकिन हकीकत इसके उलट है। हालिया सर्वे की मानें तो देश के चार कोनों को आपस में जोड़ने वाले गोल्डन ट्राइएंगल के नेशनल हाइवेज की हालत बेहद खराब है। ये राजमार्ग वाहनों की आवाजाही के लिए बहुत खतरनाक हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि बस हो या कार या ट्रक इस तरह के सभी वाहन इन राजमार्गों पर संचालन के दौरान सुरक्षित नहीं हैं।

हाल के सर्वे में पता चला है कि स्वर्णिम चतुर्भुज का दिल्ली से मुंबई को जोड़ने वाला लगभग 30 प्रतिशत और मुंबई से चेन्नई तक वाला लगभग पचास फीसदी हिस्सा वाहनों के लिए सुरक्षित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार इस सर्वे का आयोजन वर्ल्ड बैंक और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) आदि ने करवाया है।

इस स्टडी में सड़क हादसों की संभावनाओं और गंभीरता की बारीकी से जांच की गयी। इसमें सामने आया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के ये तमाम हिस्से बाइक सवारों, पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए और भी खतरनाक हैं। बताया जाता है कि सड़कों पर यात्रा के दौरान हादसों की चपेट में आने वाले इन लोगों के लिए सड़कों पर कोई सुविधा या सहायता उपलब्ध नहीं होती है।


विश्व बैंक की वैश्विक सड़क सुरक्षा सुविधा, इंटरनेशनल रोड असेसमेंट प्रोग्राम  और एनएचएआई ने इन दो राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा का आकलन करते हुए रेटिंग तय की है। इन दोनों राजमार्गों को दुनिया भर में हुई सड़क दुर्घटनाओं की स्टडी के आधार पर एक से पाँच स्टार की रेटिंग मिली है।
रिपोर्ट की मानें तो 5,431 किमी. लंबे इन दोनों कॉरिडोर के सिर्फ 40 किमी. हिस्से को 5 स्टार रेटिंग हासिल हुई है। वहीं 245 किमी. वाले एक भाग को 4 स्टार रेटिंग मिली है। दोनों राजमार्ग के नेटवर्क के लगभग 55 प्रतिशत भाग को 3 स्टार दिए गए हैं। तीन स्टार तो थोड़ा सुरक्षित कहा जा सकता है।
दोनों राजमार्गों के 39 प्रतिशत भाग को महज 1 या 2 स्टार रेटिंग दी गयी है। जिससे पता चलता है कि ये सड़कें कितनी खतरनाक हैं।

यहां बता दें कि सड़क दुर्घटनाओं में से लगभग 36 प्रतिशत लोग इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर ही मारे जाते हैं। 2017 में लगभग 52 हजार लोगों की मौत नेशनल हाईवेज पर हुई। वहीं 40 हजार लोगों ने अपनी जान स्टेट हाइवेज पर गंवाई।

गौरतलब है कि भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने गत् वर्ष अप्रैल में राजमार्गों में अधिकतम स्पीड लिमिट 100 किमी. प्रति घंटा तय की थी।

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