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चीन में भी हिंदी दिवस की धूम…

चीन में हिंदी दिवस पर लोगों ने लिया हिंदी को आगे ले जाने का संकल्प। शंघाई और क्वांगचो के विश्वविद्यालयों में हुए कार्यक्रम।

By Anil Azad Pandey

चीन के विभिन्न शहरों में हिंदी दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान शंघाई,क्वांगचो आदि शहरों में बड़ी संख्या में हिंदी प्रेमियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और भारतीय समुदाय के लोगों ने भाषण, कविता पाठ,नाटक व देशभक्ति गीत आदि के जरिए हिंदी को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए संकल्प लिया। जहां शंघाई में भारतीय कौंसलावास में अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन विश्वविद्यालय शिशु के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढकर हिंदी दिवस के कार्यक्रम में शिरकत की। वहीं क्वांगतोंग विदेशी भाषा अध्ययन विश्वविद्यालय में भी छात्रों और शिक्षकों ने हिंदी दिवस मनाया। यह इस बात का द्योतक है कि चीन में भी हिंदी को बढ़ावा देने की कोशिश जारी है।

कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने हिंदी दिवस की उपलब्धियों और उसके प्रयोग और प्रावधानों के संदर्भ में चर्चा की और यह भी बताया कि किस प्रकार हिंदी का विश्व में प्रसार हो रहा है। कार्यक्रम के समापन में कौंसलावास के सांस्कृतिक और सूचना कौंसुल प्रशांत त्रिपाठी द्वारा सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया गया। इसके साथ ही भारतीय समुदाय और शंघाई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की प्रतिभागिता की सराहना भी की।

शंघाई में इस खास अवसर पर 40 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। जिसमें इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के 12 विद्यार्थियों ने सोहनलाल गुप्त, महादेवी वर्मा,अटल बिहारी बाजपेयी, बशीर बद्र द्वारा लिखित कविताएं प्रस्तुत की। इसके साथ ही भारतीय समुदाय के विद्यार्थियों ने एक लघु नाटिका(स्किट) प्रस्तुत की,जिसमें 8 बच्चों ने हिस्सा लिया। भाषण प्रतियोगिता में चीन में हिंदी फिल्मों के प्रचार प्रसार और प्रभाव पर वक्ताओं ने यह बताने की कोशिश की कि किस प्रकार चीन में भारतीय सिनेमा को प्रमुखता से देखा जा रहा है। चीन और भारत के संबंध फिल्मों के माध्यम से सुधर भी रहे हैं और चीन वासी भारतीय समाज के प्रति जागरूक हो रहे हैं। साथ ही चीनी नागरिक भारत जाना भी पसंद कर रहे हैं,इससे दोनों देशों के बीच विश्वसनीयता बढ़ेगी।

इस अवसर पर कौंसुल संस्कृति और सूचना प्रशांत त्रिपाठी और निर्णायक मंडल में आशीष गोरे,नवीनचंद्र लोहनी और चांग युथौंग के साथ ही अन्य प्रमुख रूप से मौजूद लोगों में मुकेश शर्मा,हिमांशु चतुर्वेदी,राजीव रंजन,अमित देशमुख,इंदिरा रविंद्रन और हिना चतुर्वेदी आदि उपस्थित थे।

इस दौरान कविता पाठ का आयोजन भी हुआ। जिसमें 14 साल की उम्र से कम के प्रतिभागियों के नाम हैं, पार्थ कौस्तुभ शर्मा,जय जोशी,श्रेयांश मेनन,रविंद्र चौधरी,तोषानउल्लास शर्मा,जितिन राजन। वहीं 14 से ऊपर के आयु वर्ग में भाग लिया शांभवी, जय श्री बोरा,अविनाश नरवारे, अनीता शर्मा आदि ने।

भाषण प्रतियोगिता में शिरकत की रोहित कुमार झा, शांभवी, निधि शर्मा, रचना भगत,दीपक सुबुद्धि और सुब्रो अनिल दत्ता ने। जबकि चीनी छात्र-छात्राओं में छन श्यूइंग, छन युए, छन आनलान,इन श्याओवेइ, मेइ योंगछी, चांग होंग, लेइ रुवशी, थ्यान श्वी,ल्यांग वेइयान, गु शान,छ दान यांग चोंग, सांग ची आदि शामिल थे।

कार्यक्रम में प्रस्तुत लघु नाटिका का निर्देशन संयोजन रीना जैन ने किया। इस अवसर पर अचेना लाछेर ने रवीन्द्रनाथ टैगोर के हिंदी में अनूदित गीत का गायन किया।कार्यक्रम का संचालन आईए की सांस्कृतिक प्रभारी बीना वाघेला ने किया। कार्यक्रम में भारतीय कौंसलावास की ओर से नितेश मेहता और नवीन राणा व प्रवीन शर्मा का विशेष सहयोग रहा । प्रतियोगिताओं के अलावा हिमांशु चतुर्वेदी और हेमा नेगी ने भी कविताएं प्रस्तुत की।

वहीं क्वांगतोंग विदेशी भाषा अध्ययन विश्वविद्यालय में हिंदी का अध्ययन करने वाले चीनी विद्यार्थियों ने भी हिंदी में देशभक्ति के गीत सुनाए,हिंदी काव्य पाठ किया एवं कबीर और रहीम के दोहों का सस्वर वाचन किया। इस दौरान विश्वविद्यालय में हिंदी की शिक्षिका किरण वालिया समेत कई शिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद थी।

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