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जानिए क्यों और किस पर बौखलाया सऊदी अरब!

कनाडा के राजदूत को निकाला अपने देश से, खत्म किए नए व्यापार संबंध। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को छोड़ने की अपील पर भड़का सऊदी अरब।

 रियाद। मानवाधिकार उल्लंघन के मसले पर कनाडा के हस्तक्षेप और बयान से सऊदी अरब बौखला गया है। यहां तक कि कनाडा के राजदूत को निष्कासित कर दिया गया है। साथ ही कनाडा के साथ नए व्यापारिक और निवेश संबधों को भी खत्म करने का ऐलान सऊदी अरब ने किया है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कनाडा के बयान को उसके आंतरिक मामलों में दखलंदाजी बताया है। कहा कि वह किसी भी देश का अपने अंदरुनी मसलों में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा।

इतना ही नहीं सऊदी अरब एयरलाइंस ने सऊदी अरब और कनाडा के टोरंटो के बीच रिटर्न टिकट की बिक्री भी खत्म करने का निर्णय किया है। 13 अगस्त से सऊदी अरब और टोरंटो के बीच उड़ान भी रद्द कर दी जाएगी।

उधर सऊदी स्टेट टीवी के मुताबिक सऊदी अरब के शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि कनाडा में अध्ययन करने वाले 12 हजार सऊदी छात्रों और उनके परिजनों को अन्य देशों में शिफ्ट किया जाएगा। इसके अलावा सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय  कनाडा में इलाज करा रहे सऊदी लोगों को अन्य देशों में भेजने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि बहरीन और यूएई ने इस विवाद में सऊदी अरब का साथ देने की घोषणा की है।

क्या है मामला

दरअसल कनाडा के विदेश मंत्री ने एक बयान जारी कर रियाद से गिरफ्तार मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को छोड़ने की अपील की थी। इस पर सऊदी विदेश मंत्रालय ने कनाडा के राजदूत डेनिस होराक को 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का आदेश दिया। साथ ही कनाडा में मौजूद सऊदी राजदूत को भी वापस बुला लिया है।

माना जा रहा है कि यह विवाद सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान द्वारा शुरु किया गया। हालिया सऊदी विदेश नीति की यमन में युद्ध जारी रखने और लेबनान के प्रधानमंत्री के इस्तीफे आदि में भूमिका रही है।

ह्यूमन राइट्स वाच ने बुधवार को कहा कि सऊदी अरब ने मानवाधिकार कार्यकर्ता समर बादावी और नसीमा अल-सादाह को गिरफ्तार किया है। सऊदी अरब का यह कदम हाल के दिनों में सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों आदि के खिलाफ सख्त कार्रवाई का एक हिस्सा है। मई महीने से अब तक एक दर्जन से अधिक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हमले हो चुके हैं।

सऊदी अरब द्वारा उठाए गए सख्त कदमों के जवाब में कनाडा की विदेश मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलेंड ने कहा, कनाडा हमेशा वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाता रहेगा। और हां महिलाओं के अधिकार भी मानवाधिकार की श्रेणी में आते हैं।

 

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