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अब भी “परिवारवाद” पर विश्वास करते हैं चीनी…..

By Reena Gupta, Suzhou,China

Reena Gupta

शनिवार को पूरे दिन स्कूल में स्प्रिंग कारनिवल (बसंतोत्सव) की थकान के बाद रविवार सुबह बिस्तर छोड़ने  का बिल्कुल भी मन नहीं कर रहा थातीन घंटे पैदल चलना होगा….पैट्रिक (चीनी मित्र) ने तो मैसेज में यही लिखा था……लेकिन यह भी सच है कि पिछले कई दिनों से मैं इस यात्रा का इंतज़ार कर रही थीग्रुप में शामिल होने का वादा भी कर दिया था….फिर आज जब वो दिन आया तो कल की थकानवश इसे छोड दूँदिलदिमाग़ कुछ और कह रहा था तो शरीर कुछ और ही….तभी लेमन टी लेकर अशेष (पति) कमरे में दाख़िल हुएरीना उठोलेमन टी पी लो थकान दूर हो जाएगी! अब तो उठना ही पड़ेगा……यह सोच मैं झटपट बिस्तर छोड़ दी वैसे सच बोलूँ तो आज की इस यात्रा का मुझे सिर्फ इंतज़ार ही नहीं था बल्कि इसे लेकर मैं उत्साहित भी थी. इस उत्साह की दो वजह थीपहली यह किएल्बम ऑफ़ सूचौके साथ हमारी यह पहली यात्रा थी और दूसरी कि पैट्रिक ने हमें बताया था कि इस यात्रा के दौरान हम सूचौ के विभिन्न रमणीक स्थलों की खोज भी करेंगे विदेशी पर्यटकों को लुभाने के लिए पैट्रिक ने एक वीचैट ग्रुप बनाया था जिसमें शामिल विदेशियों के साथ स्थानीय लोग भी सप्ताहांत में सूचौ की संस्कृति और पर्यटक स्थलों की खोज में यात्रा करेंगे, ऐसा मकसद था 2014 में जब मैं पहली बार चीन आयी थी तब मुझे चीन की संस्कृति, धर्म और आस्था के बारे में कुछ ज़्यादा पता नहीं था

    हाँमैं फेंगशुई के बारे में थोड़ाबहुत जरूर जानती थी, जो विश्व की इस एक प्राचीन और विकसित संस्कृति के एक पक्ष की एक झलक मात्र है उन दिनों मैं एक किताब पढ़ रही थीचायनाउसी किताब में पहली बार  चीन में धर्म और आस्था के बारे में पढ़ा, वहीं से मुझे कन्फुशियस दर्शन के बारे में जानकारी मिली जल्द ही मैं इस दर्शन के प्रति आकर्षित हो गई, क्योंकि कन्फुशियस दर्शन भारत केपरिवारवादसे काफी मिलताजुलता है जैसे सनातन धर्मवसुधैव कुटुम्बवकम” ( पूरी धरती और यहाँ के निवासी हमारा परिवार है) इस विचारधारा की वकालत करता है और जीवन जीने की कला सिखलाता है वैसे ही कन्फुशियस विचारधारा भीसुव्यवस्थित सामाजिक संरचनाकी वकालत करता है जिसमें समाज और परिवार के लोग एकदूसरे के साथ नैतिक मूल्यों के आधार पर बँधे होते हैं ये नैतिक संबंध परिवार/ समाज  के पाँच रिश्तों के बीच के संबंधों को परिभाषित करता हैये पाँच संबंध हैं अभिभावक बच्चे ( पुत्रपिता), शासकजनता, भाईभाई, पतिपत्नी और मित्रमित्र

चीन के इस महान विचारक और शिक्षक कन्फ़ुशियस  का पारिवारिक दायित्व और कुशल शासन का सिद्धांत परोपकार, सत्यनिष्ठा और धर्म पर आधारित है चीन में इस विचार धारा का जन्म तांग के राज्य काल में  सातवीं शताब्दी में हुआकन्फ़ुशियस का दर्शन बौद्ध धर्म  और ताओ वाद का विरोध करता है जो उस काल में अत्यधिक प्रभाव शाली हो गए थे और व्यक्ति को परिवार से विमुख कर रहे थेयह दर्शन परिवार और सामाजिक सामंजस्य को आध्यात्म से ऊपर मानता हैबीसवीं सदी के उत्तरकाल  से ही कन्फुशियस कार्य नीति या वर्क एथिक को चीन की प्रगति का कारण माना जा रहा है। इस दर्शन ने ना सिर्फ चीन बल्कि पड़ोसी देशों मसलन जापान, कोरिया और वियतनाम की जीवनशैली को भी प्रभावित किया पिछले कुछ वर्षों में कन्फुशियस वाद की जड़ें और मजबूत हुई हैं और 2015 के उत्तरार्ध में कन्फुशियस विचारधारा का प्रतिनिधित्व करनेवाले  कुछ विशिष्ट लोगों  ने मिलकर कन्फुशियन होली चर्च की स्थापना भी कर डाली है जो इस विचारधारा से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास है

मैं कन्फुशिएज्म के बारे में और ज़्यादा जानना चाहती थी लिहाज़ा उस दिन जब  पैट्रिक ने इस यात्रा में शामिल होने का आग्रह किया तो मैंहाँकहने से खुद को रोक नहीं पाई यह सचमुच प्रशंसनीय बात है कि इस आधुनिक युग में जब चीन भी पश्चिमी सभ्यता के अतिक्रमण से अछूता नहीं है, इन लोगों ने  अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को काफी हद तक बचाकर रखा है सूचौ कन्फ़ुशियस  मंदिर ( चीन में  म्युजियम को भी मंदिर ही बोलते हैं) का प्रांगण काफी बड़ा है मुख्य हॉल के अंदर बड़ी शांति है जब हमारे साथ आये सूचौ विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर ज़िम्मी ने यह बताया कि आज भी चीन में कई जगहों पर कन्फ़ुशियस  के मूल दर्शन कुछ निजी संस्थानों में पढ़ाये जाते हैं ,तो यह जानकर मुझे खुशी हुई यह एक हद तक उस शिक्षा का ही असर है कि पूर्व में आर्थिक और राजनीतिक उतारचढ़ाव के बावजूद चीन के लोग 20वीं सदी में भी परिवारवाद पर भरोसा करते हैं और  संघीय परिवार में आज भी इनका विश्वास बना हुआ है दरअसल, चीन के लोगों ने अपनी संस्कृति को बचाये रखने के लिए मेहनत की है और इनकी सांस्कृतिक सामाजिक व्यवस्था की  जड़ें काफी गहरी हैं

...जारी है…

                       

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