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अफ्रीकी विकास का इंजन बना चीन….

चीन-अफ्रीका सहयोग मंच का सम्मेलन 3 सितंबर से बीजिंग में होगा आयोजित। चीन और अफ्रीका के कई बड़े नेता करेंगे शिरकत। दुनिया के जाने-माने विशेषज्ञों और मीडिया की नजर इस सम्मेलन पर। चीन और अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 170 अरब डॉलर से अधिक। पिछले नौ वर्षों से चीन लगातार अफ्रीका का नंबर वन बिजनेस पार्टनर।

By Anil Azad Pandey, Beijing

पिछले लगभग चार दशक से चीन दुनिया के तमाम विकसित, विकासशील और गरीब देशों में अपनी गहरी पैठ बना रहा है। खुलेपन और सुधार की नीति लागू होने के बाद चीन के दरवाजे जहां दुनिया के लिए खुले, वहीं विदेशी धरती पर चीन की धमक सुनाई दी। आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। एशिया से लेकर अफ्रीका तक में चीनी कंपनियों और उत्पादों की धूम है। अफ्रीका के साथ चीन के रिश्ते काफी प्रगाढ़ हैं। इसी बीच चीन की राजधानी बीजिंग में 3 सितंबर से दो दिवसीय चीन-अफ्रीका सहयोग मंच का शिखर सम्मलेन आयोजित हो रहा है। इससे पहले 2 सितंबर को सहयोग मंच का 7 वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन भी होगा। इस सम्मेलन पर विश्व भर की मीडिया और विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है।

यहां बता दें कि चीन ने पिछले कई वर्षों से अफ्रीका के गरीब और अविकसित क्षेत्रों के विकास पर खासा ध्यान दिया है। चीनी कंपनियां न केवल अफ्रीकी देशों में व्यापार करती हैं, बल्कि वहां आधारभूत संस्थापनों के विकास में भी अहम भूमिका निभाती हैं। स्कूल, अस्पताल, सड़क और रेल हर क्षेत्र में चीन की मजबूत उपस्थिति देखी जा सकती है। इस तरह चीन अफ्रीकी लोगों के जीवन-स्तर को सुधारने में लगा हुआ है। हालांकि चीन से पहले अफ्रीका में पश्चिमी देशों का बोलबाला था, उन्होंने स्थानीय संसाधनों का खूब दोहन किया। लेकिन विकास के नाम पर अफ्रीका में कुछ नहीं हुआ। जैसे ही चीन को अफ्रीका में काम करने का मौका मिला, अफ्रीका के कई देशों की स्थिति बेहतर हुई है। बीजिंग में होने वाले शिखर सम्मेलन के दौरान भी चीन और अफ्रीका के बीच सहयोग संबंधी कई मुद्दों पर चर्चा होगी और समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे।

सम्मेलन से पहले चीन की ओर कई वक्तव्य जारी किए गए, जिनमें अफ्रीका के साथ सहयोग को नए स्तर तक पहुंचाने का ऐलान किया गया। साथ ही अफ्रीका का भविष्य खुद अफ्रीकी नागरिक तय करें, इस पर भी चीन जोर दे रहा है। चीन के उप वाणिज्य मंत्री के शब्दों में, पहले चीन अपने डिजाइन के मुताबिक अफ्रीकी देशों के साथ सहयोग करता था। लेकिन  आगामी सम्मेलन के बाद चीन अपने विशेषज्ञों और टीमों को अफ्रीका भेजेगा। इसके बाद अफ्रीकी देशों में मौजूद चीनी दूतावास और अफ्रीकी प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श कर विकास की रूप-रेखा तय करेगा। कहा जा सकता है कि चीन-अफ्रीका सहयोग का व्यापक विस्तार होगा।

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की पहल पर शुरू हुई बेल्ट एंड रोड परियोजना भी अफ्रीका और चीन के संबंधों को मजबूत बना रही है। क्योंकि इससे दोनों पक्षों को लाभ जाहिर है। इसी दिशा में चीन और अफ्रीका आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को नया आयाम देने के लिए बेल्ट एंड रोड परियोजना का सहारा लेंगे। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह देखना अहम होगा कि चीन और अफ्रीका एक-पट्टी एक-मार्ग परिजयोजना को संयुक्त राष्ट्र के 2030 के सतत् विकास एजेंडे और अफ्रीकी संघ के 2063 एजेंडे से कैसे जोड़ते हैं।

गौरतलब है कि चीन लगातार पिछले नौ साल से अफ्रीका का सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर है। 2017 तक द्विपक्षीय व्यापार 170 अरब डॉलर पहुंच चुका है। जिसमें सालाना 14 फीसदी की दर से इजाफा हो रहा है। जबकि चीन ने पिछले तीन वर्षों में अफ्रीका में 3 अरब डॉलर का वार्षिक प्रत्यक्ष पूंजी निवेश भी किया। चीन और अफ्रीका के बीच बढ़ते बिजनेस से यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं कि दोनों के बीच व्यापारिक रिश्ते कितने मजबूत हो चुके हैं। ध्यान रहे कि चीन ने 2015 में दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में हुए चीन-अफ्रीका सम्मेलन में 10 मुख्य योजनाओं का ऐलान किया था। जिनमें से अधिकतर आर्थिक और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित थी। इसका असर द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्र में लंबी छलांग के रूप में देखा जा सकता है।

बढ़ते व्यापारिक संरक्षणवाद और खुली बाजार व्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों के लिहाज से चीन और अफ्रीका का यह मंच और अहम होने वाला है। चीनी राष्ट्रपति ने अफ्रीकी नेताओं के साथ भेंट में कहा कि, यह मंच दोनों पक्षों के बीच व्यापक सामरिक रिश्तों को और आगे बढ़ाने के साथ-साथ विकासशील देशों की एकता व सहयोग को सुदृढ़ करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा।

इतना ही नहीं आने वाले समय में चीन अपने बाजार का अफ्रीका के लिए और विस्तार करेगा। इसमें अफ्रीका की निर्यात क्षमता को बढ़ाने में चीन की भूमिका अहम होगी। यह कहने में कोई दो राय नहीं कि चीन अफ्रीका के विकास का इंजन बन चुका है। अगर इस इंजन को अफ्रीका से अलग कर दिया जाय तो अफ्रीका की स्थिति में सुधार तो कतई नहीं होगा।

The Writer is a senior journalist in China Radio International and has worked with the leading Newspapers of India.

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