chati, Indian culture, in China
संस्कृति

चैती की धुन पर धड़केगा चीनियों का दिल

भारत की दुनिया में पहचान क्या है और क्या होनी चाहिए, यह हमेशा से एक बड़ा सवाल रहा है। इस सवाल का उत्तर खोजने की कोशिश की, भारत के युवाओं ने। उन्होंने शांघाई में सांस्कृतिक संस्था चैती बनाई। इस सांस्कृतिक संस्था के माध्यम से वे भारतीय संस्कृति को पहुंचा रहे हैं आम लोगों तक।  इस साल 2 जून से चैती का सांस्कृतिक आयोजन हो रहा है। जिसमें उस्ताद सुजात खान सितार के साथ सुरों को छेड़ने वाले हैं उनके साथ अमित चौबे और बिभाकर चौधरी तबले पर रहेंगे । 

By Naveen Chandra Lohani 

शंघाई। चैती ने शंघाई में भारतीय क्लासिकल गीत, संगीत और नृत्य की  सुंदर और भव्य प्रस्तुतियां कराई। पिछले पांच सालों में चैती का प्रदर्शन  सांस्कृतिक विरासत को चीन में पहुंचाने का ही नहीं रहा है अपितु इस संस्था से जुड़े युवा चीन वासियों को भारतीय दर्शकों का मंच भी सुलभ करा रहे हैं । सिद्धार्थ सिन्हा और उनके दोस्तों ने मिलकर जो अभियान शुरू किया है धीरे-धीरे उसे भारतीयों के साथ-साथ चीनी दर्शकों का भी  मंच मिलने लगा है।

chati, Indian culture, in Chinaशंघाई में तमाम भारतीय समूहों में चैती ने अपना विशेष स्थान बनाया है तो उसके पीछे उसका खास दर्शन है कि भारतीय कलाओं की असली पहचान उसकी परम्पराओं की कलाओं में है, वालीवुड संगीत-नृत्य संगीत से नहीं । इसलिए उसकी कलाओं की पहचान भारतीय क्लासिकल में ही करनी चाहिए । चार दोस्तों ने इस विचार को अमली जामा पहनाया और 2012 में चैती नाम से शुरू हुआ यह सफर  चीन की कलासंस्थाओं में शुमार हो गया है। इस साल 2 जून से चैती का सांस्कृतिक आयोजन हो रहा है। जिसमें उस्ताद सुजात खान सितार के साथ सुरों को छेड़ने वाले हैं उनके साथ अमित चौबे और बिभाकर चौधरी तबले पर रहेंगे । भारतीय क्लासिक कुचिपुड़ी नृत्य में वैजयंती काशी और प्रतीक्षा काशी के साथ चीनी नृत्यांगना लुलू वांग मंच पर एक साथ कला का प्रदर्शन करेंगे। शनिवार 2 जून को शंघाई सेंटर थियेटर का यह आयोजन अपने आप में अनूठा होगा । जिसमें पिछले सालों की भांति इस साल भी भारी संख्या में  भारतीय और चीनी दर्शकों के साथ-साथ अन्य देशों के नागरिक भी जुटेंगे ।

chati, Indian culture, in Chinaइस बार यह कार्यक्रम  शंघाई के अलावा  8 जून को सूज़ौ में भी आयोजित रहा है। चैती आर्ट्स फेस्टिवल कार्यशालाओं, कक्षाओं के माध्यम से संगीत, कला चीन में भारतीय कला की जागरूकता और गहरी समझ बनाने और जोड़ने में लगा है। सामुदायिक एकजुटता और पारस्परिक सम्मान पैदा करने में कला और संस्कृति मजबूत स्तम्भ हैं । संगीत और कलाओं में भावनाओं को जोड़ने और सद्भाव बनाने की क्षमता है। इसलिए चैती कला महोत्सव ‘मानवता के लिए सद्भावना’ की सोच लेकर भूगोल की सीमाओं के ऊपर संस्कृति, भाषा और कला की क्षमता को प्रतिष्ठित कर रहा है। इसलिए यह चीन वासियों से भारतीय शास्त्रीय संगीत और भारतीय कला के विश्वस्तरीय भारतीय कलाकारों को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण मंच बन गया है । भारतीय और चीनी संस्कृति के आदान-प्रदान को मजबूत करने के लिए चैती चीन और भारतीय कला और संस्कृति की स्वर्णिम पहचान को एक साथ लाने में जुटा है ।

लेखक शंघाई इंटरनेशनल स्टडीज़ यूनिवर्सिटी में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर हैं।

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