अपडेट

‘आप’ की जीत, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एलजी नहीं अड़ा सकते हर फैसले पर टाँग

सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर, पार्टी ने इसे दिल्ली की जनता की जीत बताया

नई दिल्ली। पिछले लंबे समय से इस बात पर बहस हो रही थी कि आखिर दिल्ली का बॉस कौन है। लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना अहम फैसला सुना दिया है। जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि चुनी हुई सरकार लोकतंत्र में महत्वपूर्ण होती है। मंत्रिपरिषद के पास फैसले लेने का अधिकार है। एलजी को हर फैसले पर हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। फैसला आने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि यह दिल्ली के लोगों की बड़ी जीत है, लोकतंत्र की बड़ी जीत है।

लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था, जनता के द्वारा चुनी हुई आम आदमी पार्टी सरकार या केंद्र के प्रतिनिधि उप राज्यपाल। आए दिन देखा गया कि दिल्ली सरकार द्वारा लिए जाने वाले हर छोटे-बड़े फैसले पर एलजी द्वारा हस्तक्षेप किया जाता रहा। डोर-टू-डोर सर्विसेज के निर्णय पर भी एलजी ने ब्रेक लगाया। आम आदमी पार्टी ने कई बार आरोप लगाया था। इसके बाद मुद्दा अदालत में पहुंचा था।

यहां बता दें कि बुधवार को सर्वोच्च अदालत की संविधान पीठ ने अपने एक प्रमुख निर्णय में कहा कि लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार अहम होती है। ऐसे में सरकार की मंत्रिपरिषद के पास फैसले लेने का अधिकार है। जबकि एलजी के पास स्वतंत्र फैसले लेने की शक्ति नहीं है। साथ ही उनकी भूमिका खलल डालने वाली नहीं होनी चाहिए। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो वे हर मामला राष्ट्रपति के पास नहीं भेज सकते हैं। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि हर मामले पर उप राज्यपाल की सहमति जरूरी नहीं है। हालांकि कैबिनेट को फैसलों की जानकारी एलजी को देनी होगी। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा, हमने सभी पहलुओं-संविधान,239एए की व्याख्या, मंत्रिपरिषद की शक्तियों आदि पर गौर किया। इस तरह देश की सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली की असली बॉस दिल्ली सरकार ही है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार बनाम एलजी के मामले में 11 याचिकाएं दाखिल की गयी थी। वहीं इस मामले पर 2 नवंबर 2017 से सुनवाई शुरू हुई थी। 15 सुनवाई में पूरा मामला सुनने के बाद 6 दिसंबर 2017 को पाँच जजों की पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि दिल्ली के मुखिया एलजी ही हैं, कोई भी फैसला उनकी अनुमति के बिना न लिया जाय।

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी द्वारा पिछले विधानसभा चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल करने के बाद से ही दिल्ली सरकार, एलजी और केंद्र के बीच खींचतान जारी है। अकसर देखा जाता है कि केंद्र और एलजी आम आदमी पार्टी सरकार के हर फैसले पर बेवजह दखलंदाजी करती है। सुप्रीम कोर्ट के इस अहम फैसले के बाद केंद्र सरकार और एलजी को अब बात समझ में आ जानी चाहिए। साथ ही दिल्ली सरकार को जनहित के काम करने देने चाहिए।

संक्षेप में जानें, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा-

  1. एलजी मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता पर काम करने के लिए बाध्य हैं।
  2. उप राज्यपाल के पास स्वतंत्र फैसले लेने की पावर नहीं, वे बाधक न बनें।
  3. मंत्रिपरिषद को फैसलों की जानकारी एलजी को देनी चाहिए, लेकिन उन पर एलजी की सहमति की जरूरत नहीं है। साथ ही कहा कि न किसी को तानाशाही करनी चाहिए और न ही अराजकता वाला रवैया।
  4. एलजी को मशीनी तरीके से काम कर मंत्रिपरिषद के फैसलों पर रोक नहीं लगानी चाहिए।
  5. एलजी को यह समझना होगा कि मंत्रिपरिषद जनता के प्रति जवाबदेह है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *