Beed constable Lalita became Lalit
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बीड कांस्टेबल ललिता ऐसे बन गई ललित पढ़िए पूरी खबर

मुंबई। सिस्टम और खुद के खिलाफ चार साल के संघर्ष के बाद बीड कास्टेबल ललिता साल्वे शुक्रवार को ललित साल्वे बन गयी। मुंबई के सेंट जार्ज हास्पिटल में वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डा. रजत कपूर और उनकी टीम ने ललिता की लिंग परिवर्तन सर्जरी की। जेनिटल रीकंस्ट्रक्शन सर्जरी की प्रक्रिया में यह पहली सर्जरी है। 6 महीने बाद दूसरी सर्जरी की जाएगी।

29 वर्षीय ललिता लैंगिक पहचान के सवाल को लेकर जूझ रही थी और आदमी के तौर पर जीना चाहती थी। लिंग परिवर्तन सर्जरी कराने के लिए ललिता  राज्य के डीजीपी से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई थी।

डा. रजत कपूर की अगुवाई में डाॅक्टरों की टीम ने तीन घंटे में सर्जरी को पूरा किया गया। डा. कपूर ने बताया कि सर्जरी का पहला चरण सफल रहा। उन्होंने बताया कि ललिता के शरीर में किसी तरह के महिलाओं के अंग नहीं हैं। उसके शरीर में पुरुषों वाले हार्मोन्स हैं। हमने जांघ से त्वचा और ऊतकों का उपयोग कर नर जननांग पुनर्निमार्ण किया। तीन से छह महीने में इससे पेशाब करने में मदद मिलेगी । ललिता की मां केसरबाई ने कहा कि वह खुश है कि उसके बेटे को आखिरकार अपनी वांछित पहचान मिल गयी है।

दाढ़ी मूछ भी लगेगी
ललिता को पूर्ण रूप से पुरुष बनाने के लिए छह महीने बाद एक और सर्जरी की जानी है। इसके अलावा उसके चेहरे पर दाढ़ी मूछ भी ट्रांसप्लांट की जाएगी। इसके बाद ललिता आम पुरुषों की तरह जी सकेगी।

अविकसित था लिंग
ललिता साल्वे का जन्म के वक्त से ही लिंग अविकसित था। उसका स्क्रोटम भी नहीं दिख रहा था। सात साल की उम्र में उसके टेस्टिकल (अंडकोश) को ट्यूमर समझकर एक डॉक्टर ने सर्जरी करके निकाल दिया था। हालांकि ललिता हमेशा से पुरुष की तरह जीना चाहती थी। 2016 में पहली बार डा. रजत कपूर ने जांच में पाया कि ललिता को ‘जेंडर डिस्फोरिया’ की शिकायत है।

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