संस्कृति

चीन के कौन से शहर में है भारत के सम्राट के नाम पर बना मंदिर ?

By Pankaj Shrivastava

बीजिंग। चीन के चच्यांग प्रांत के निंगबो शहर में मौर्य सम्राट अशोक का एक मंदिर है। इस मंदिर को निंगबो में इस्वी सन 282 में बनाया गया था। शहर के पहाड़ी इलाके में बना एक खूबसूरत पगोडा दूर से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है। ये पगोडा ताईपाई पहाड़ी की लुहुआ चोटी पर बना है और चीन के पांच सुप्रसिद्ध बौद्ध पहाड़ियों में से एक है। ये मंदिर बौद्ध धर्म की ज़ेन शाखा का है जिसे साल भर में हज़ारों चीनी और जापानी बौद्ध श्रद्धालु देखने आते हैं। पूरे चीन में ये अकेला ऐसा बौद्ध मंदिर है जो बौद्ध धर्म के संरक्षक अशोक के नाम पर बना है।

चिन साम्राज्य काल (282ईस्वी) में बने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां भगवान बुद्ध (शाक्यमुनी) के अस्थि अवशेष रखे हैं, सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए 84 हज़ार समाधियों में से एक है जो सात स्तरीय पत्थर के बने स्तूप में बीस इंच ऊंची है।
कहा जाता है कि निंगबो में एक बौद्ध भिक्षु जिसका नाम हुई लियान था, मंदिर के लिये जगह तलाश रहा था कि तभी ज़मीन में से आवाज़ आई जहां पर गर्म पानी का सोता था, और यहीं पर अद्भुत तरीके से एक मंदिर प्रकट हुआ। वर्ष 405 इस्वी में एक सम्राट ने इस घटना की पुष्टि करते हुए यहां मंदिर परिसर में कुछ भवन बनवाए, वर्ष 502 इस्वी में कुछ और भवन इस परिसर में जोड़े गए। इसके बाद सम्राट लियांग वूती जो कि बौद्ध धर्म का संरक्षक था ने इस परिसर में कुछ और भवनों को खड़ा किया।

इस मंदिर की ऐतिहासिकता भी है, सोंग राजवंश के कवि सुशी ने इस मंदिर के बारे में विस्तार से लिखा है। महान चीनी सुलेख शास्त्री च्यान छन ने भी इसके बारे में लिखा है ठीक वैसा ही जैसा कि सोंग राजवंश के सुलेख शास्त्री ने लिखा है ।
सन 1993 में इस मंदिर परिसर के पूर्वी हिस्से का पुनर्रुद्धार  करते समय इस मंदिर से जुड़े कुछ लेख युआन, मिंग और छिंग राजवंश काल के भी पाए गए। इस मंदिर परिसर में कुछ सुंदर बागीचे और खूबसूरत दृष्य देखने को मिल जाते हैं।

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