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चीनी प्रोफेसर च्यांग चिंगख्वेई समेत 26 विद्वानों को प्रतिष्ठित हिंदी पुरस्कार, पांच लाख की राशि भी!

1985 से हिंदी से जुड़े हैं प्रोफेसर च्यांग, हिंदी और भारतीय संस्कृति से है गहरा लगाव, अब तक 6 पुस्तकें हो चुकी हैं प्रकाशित
 
  • By Anil Azad Pandey 
 बीजिंगः हिंदी के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले 26 विद्वानों के नामों का ऐलान कर दिया गया है। जिसमें चीनी प्रोफेसर च्यांग चिंगख्वेई और मॉरीशस के सत्येंद्र टेंगर का नाम भी शामिल हैं। उक्त दोनों विद्वानों को डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दिया जाएगा। विदेशी हिंदी विद्वानों को विदेश में हिंदी के प्रचार-प्रसार और लेखन में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह अवार्ड दिया जाता है। यहां बता दें कि केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा की हिंदी सेवी सम्मान योजना के अंतर्गत साल 2016 के लिए 12 श्रेणियों में पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। जिसके तहत पांच लाख रुपए की राशि भी प्रदान की जाएगी। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर नंद किशोर पांडे ने अवार्ड पाने वाले सभी विद्वानों की सूची जारी की।
प्रोफेसर च्यांग
 हिंदी के प्रमुख हस्ताक्षर प्रो. च्यांग चिंगख्वेई को पुरस्कार दिए जाने की घोषणा से चीन में हिंदी सीख रहे छात्रों और हिंदी के अध्यापन कार्य से जुड़े शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। चीन में भारतीय दूतावास और काउंसलेट, शांगहाई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी, पेकिंग विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर के.एन.तिवारी, बीजिंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के डॉ. बलबीर सिंह, शनचन विश्वविद्यालय की गीता शर्मा, विदेशी अध्ययन विश्वविद्यालय ग्वांगतोंग, क्वांगचो की किरण वालिया, शांगहाई विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक राजीव रंजन, चीन में लंबे समय से रह रहे और चीनी भाषा के जानकार विकाश सिंह आदि ने उन्हें बधाई दी है।
पुरस्कार मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात : प्रो. च्यांग 
    प्रो. च्यांग ने साक्षात्कार में कहा कि यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। हिंदी का प्रचार-प्रसार ही मेरा उद्देश्य है। वास्तव में मुझे हिंदी की सेवा करने का फल हासिल हुआ है। लगभग 34 वर्षों से हिंदी से जुड़ा हुआ हूं। मैं कह सकता हूं मुझे हिंदी और भारतीय संस्कृति से अलग नहीं किया जा सकता है। इस पुरस्कार से चीन में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए मुझे और ताकत मिलेगी। पहले सिर्फ दो या तीन विश्वविद्यालयों में ही हिंदी पढ़ाई जाती थी, लेकिन वर्तमान में लगभग 15-16 विश्वविद्यालयों में चीनी छात्र हिंदी सीख रहे हैं। यह जानकर बहुत खुशी होती है कि हिंदी प्रगति कर रही है। प्रो. च्यांग कहते हैं कि जब उन्होंने हिंदी का अध्ययन शुरू किया, उस वक्त लोग हिंदी के बारे में बहुत कम जानते थे। अंग्रेजी ही भारत की भाषा समझी जाती थी। आज चीन के तमाम विश्वविद्यालयों में हिंदी विभाग खुल रहे हैं, यह हिंदी की वैश्विक लोकप्रियता का एक प्रमाण है।
हालांकि प्रो. च्यांग साफतौर कहते हैं कि हिंदी का साथ देने का मतलब यह नहीं है कि वे भारत की अन्य भाषाओं या अंग्रेजी का विरोध करते हैं। हां उन्हें भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव है, जिसमें हिंदी एक पुल का काम करती है। हिंदी भारत की प्रतीक है, इसके जरिए हम भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति को गहराई से जान सकते हैं।
बकौल प्रो. च्यांग आने वाले दिनों में चीन में हिंदी और नए मुकाम हासिल करेगी, इस दिशा में प्रयास जारी हैं। जिससे भविष्य में चीन के अन्य विश्वविद्यालयों में भी हिंदी का अध्यापन कार्य शुरू हो सकेगा।
उनके अनुसार हिंदी और भारतीय संस्कृति से प्रेम का सीधा संबंध चीन-भारत की दोस्ती से भी है। कहते हैं कि हमारा मुख्य लक्ष्य एशिया की दो पड़ोसी शक्तियों के बीच रिश्ते मजबूत करना है। संबंध सुधारने में हिंदी अहम भूमिका निभा सकती है, अंग्रेजी नहीं। इसके साथ प्रो.च्यांग ने भारत सरकार और केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा को विशेष धन्यवाद दिया।

                                     प्रो. च्यांग चिंगख्वेई का परिचय

पूर्वी चीन के च्यांगसू प्रांत के ख्वाई आन शहर में जन्मे च्यांग चिंगख्वेई ने हाईस्कूल तक की शिक्षा अपने गृहनगर से हासिल की। इसके बाद वे बीजिंग आ गए और यहीं पर साल 1985 से पेकिंग विश्वविद्यालय से हिंदी में अध्ययन शुरू किया। तत्पश्चात केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा और जेएनयू से भी हिंदी की पढ़ाई की। हिंदी से उनका यह लगाव अब तक जारी है।

प्रो. च्यांग महाकवि सूरदास द्वारा रचित सूरसागर का ब्रज भाषा से चीनी में अनुवाद कर चुके हैं, वहीं चीनी-हिंदी डिक्शनरी के संकलन कार्य में भी उनकी अहम भूमिका रही है। अब तक उनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही 20 पुस्तकों के संकलन के अलावा प्रो. च्यांग भारत से जुड़े 70 अकादमिक लेख भी लिख चुके हैं।
The Writer is a senior journalist and has worked with the leading Newspapers of India

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